जीवन क्या है ? अबुझ अनसुलझी पहेली ..........खुशनुमा हवा का झोंका ,....या फिर एक तेज अन्धढ़ ..........शायद
अनगिनत गांठों का एक गुच्छ ........सुलझाने की कोशिश में एक ओर नई गांठ ...पुरानी नई के बोझ तले कहीं पीछे दब जाती है .फिर कभी जब नासूर की तरह फुटती हैं तो कई हिस्सों में बन्ट जाती हैं ...
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