nye goonj
Tuesday, March 29, 2011
किनारे
नदी के दो किनारे साथ-साथ चलकर भी बहुत दूर
, शायद ये उनकी नियति है,टूट सकते हैं पर
क्षितिज नहीं बन सकते ............
.दूसरा नज़रिया कहता है --नदी के दो किनारे
तकते रहे एक दूजे को ताउम्र
,जब तक चले साथ चले
मिटे तो साथ सागर में जा मिले...
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Shashi Bansal
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