चलले लाख चालें , जीत भी ले भले कई बार
भूलना न मगर , कभी ईश्वर का इन्साफ
जिस दिन , उसकी लाठी उठेगी ,उस दिन
मुँह छिपाने को , धरती भी छोटी पड़ेगी ।
( शशि )
भूलना न मगर , कभी ईश्वर का इन्साफ
जिस दिन , उसकी लाठी उठेगी ,उस दिन
मुँह छिपाने को , धरती भी छोटी पड़ेगी ।
( शशि )
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