Wednesday, December 31, 2014

कैसा स्वागत???


खट खट खट....
कौन है भाई ? इतनी तेज़ दरवाज़ा क्यों पीट रहे हो ।
अरे पहचाना नहीं ....मैं हूँ ।
मैं कौन ? 
अरे पहले दरवाज़ा तो खोलो अंदर से ही चिल्लाती रहोगी ।
बड़े अज़ीब हो न नाम बताया ना पहचान लगे हो दस्तक पे दस्तक देने में ...... जाओ मैं नहीं खोलती ।
अच्छा अच्छा ... गुस्सा मत करो मैं हूँ नव वर्ष ।
ओह्ह्ह ... तुम !!! 
क्या तुम खुश नहीं हो मेरे आने से ?
ह्म्म्म्म... तुम तो पिछले बरस भी आये थे न ? 
हाँ आया था नए नए स्वप्न लेकर खुशियाँ लेकर । इस बार भी वही सब लाया हूँ ।बोलो तुम्हे क्या चाहिए ?
हाहाहाहा.... क्या दे सकते हो तुम किसी को बस झूठे ख्वाब , न पूरी होने वाली उम्मीदें , बड़े - बड़े वादे ... हूँ बात करते हो । क्या तुम विश्वास दिला सकते हो अब कोई कन्या भ्रूण में नहीं मरेगी और अगर वहाँ नहीं मारी गई तो कचरे मलबे या नाले में नहीं मरेगी । गर जी गई कुछ साल तो दरिंदों के हाथ नहीं लगेगी । कोई मानव भूख से नहीं मरेगा । हर घर में एक दिया जल सके इतना तेल अवश्य होगा । कोई बूढ़े माँ -बाप बेघर नहीं किये जाएँगे । सबके पास काम होगा अन्न होगा । सब मिलजुलकर रहेंगे । जाति- धर्म के नाम पर लड़ाई झगड़े नहीं होंगे । कहीं कोई बम नहीं फटेगा कोई मासूम धमाकों में नहीं मारा जायेगा । दहेज़ के लिए कोई अबला सताई नहीं जायेगी । किसी की उम्मीदें नहीं टूटेंगी ।और और .....
बस - बस ...बहुत हो गया ....
बहुत ....बताओ दे सकते हो ये सब ? 
ये सब क्या माँग रही हो मैं तो खुद असहाय हूँ ।
ठीक है तो फिर अपने को नया मत कहो ।नाम बदलने से सूरत नहीं बदल जाती।जब सब कुछ वही ही रहना है तो फिर कैसा स्वागत कैसी ख़ुशी कैसा आनंद ।
ठीक कहती हो जब मैं कुछ बदल नहीं सकता तो मेरे स्वागत का भी कोई औचित्य नहीं । पर मैं इतनी दूर आ चूका हूँ कि लौट भी तो नहीं सकता ।
मत लौटो पर याद रखो एक दिन भविष्य तुम्हारा इतिहास अवश्य खोलेगा और तुम तब नव नहीं होगे पुराने हो जाओगे ....जीर्ण - शीर्ण हो चुकोगे ।
( शशि )

No comments:

Post a Comment