नव विवाहिता संगीता ने प्रथम दिवस उठकर लजाते हुए जैसे ही सास के पैर छुए ,सास ख़ुशी से गदगद हो गई और ढेर सारा आशीर्वाद उड़ेल दिया परंतु जब यही संस्कार ननद के साथ निभाया तो उसने उसे यूँ झिड़क दिया मानों वह कोई अछूती हो और उसे छूकर वह खुद भी अछूती हो जायेगी ।
इसकी तो संगीता ने कल्पना ही नहीं की थी । जो चेहरा पल भर पहले तुरंत खिले गुलाब सा दमक रहा था, मुरझा गया ।अचानक उसके ज़ेहन में पंक्तियाँ बजने लगीं " ससुराल गैंदा फूल ...।"
( शशि )
No comments:
Post a Comment