भयानक दंगाई रात में "लो बेटी ! अब इस जहर को पीने के सिवा हमारे पास बचने का कोई और रास्ता नहीं है । जो भविष्य मैं तुम्हारा देख रहा हूँ उससे ये मौत बेहतर है ।"
"खबरदार जो कोई इस घर के दरवाजे तक एक कदम भी बड़ा या मेरी बेटी की ओर आँख उठा के भी देखा तो ....चीर के रख दूँगा ।"
पड़ौस के रहीम मियाँ, जिनसे रामकिशन का बरसों से अनबोला था, दरवाज़े पर वज्रढाल बन खड़े हो गए थे ।नफ़रत की दीवार आत्मग्लानि से आहिस्ता-आहिस्ता ढह रही थी ।हृदयों के बीच भाईचारे का नया रिश्ता प्रस्फुटित हो रहा था ।
( शशि )
"खबरदार जो कोई इस घर के दरवाजे तक एक कदम भी बड़ा या मेरी बेटी की ओर आँख उठा के भी देखा तो ....चीर के रख दूँगा ।"
पड़ौस के रहीम मियाँ, जिनसे रामकिशन का बरसों से अनबोला था, दरवाज़े पर वज्रढाल बन खड़े हो गए थे ।नफ़रत की दीवार आत्मग्लानि से आहिस्ता-आहिस्ता ढह रही थी ।हृदयों के बीच भाईचारे का नया रिश्ता प्रस्फुटित हो रहा था ।
( शशि )
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