Tuesday, April 14, 2015

युद्ध क्यों ? ( लघुकथा - 36 )

दीपावली का अवसर था । सीमा पर शांति भी थी । अतः सभी सैनिक परिवारों ने दीपावली साथ में बहुत हंसी ख़ुशी से मनाई । दूसरे दिन फ्लैग मार्च था । पति ने साथ चलने को कहा तो उत्सुकतावश हाँ तो कह दिया पर डर के कारण पीछे रुक गई ।हमारी ओर के सैनिकों को आता देख उस ओर के सैनिक भी अपने बंकरों से निकल आये और हालचाल पूछते हुए दीवाली की शुभकामना देने लगे । हमारे द्वारा लाई मिठाई भी उन्होंने सहर्ष स्वीकार ली ।इस आपसी सौहाद्र को देख हृदय मस्तिष्क से प्रश्न करने लगा । क्या पहाड़ों की बर्फ विभाजन रेखा देख अपने पाँव रोक लेती है ? क्या इधर से गुजरने वाली हवा उस ओर से पलट आती है।सूर्य प्रकाश देते समय सरहद का भेद करता है ? क्या आकाश की नीलिमा दोनों ओर बँट जाती है ? जब प्रकृति दोनों ओर साझी है ,मानवीय गुण एक हैं तो फिर युद्ध क्यों? 
( शशि )

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