Saturday, April 18, 2015

अबोध अंधी ( लघुकथा 38 )

" बेटा इसे छूओ । ये दूरबीन है । इससे न दिखने वाली दूर की चीज़ भी देख सकते हैं ।"
" क्या इससे आप भी दिख जाओगे पापा ? "
" नहीं ।क्योंकि , मैं तो तुम्हारे पास हूँ ।"
" तो फिर आप भी दूर चले जाओ ।"
( शशि )

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