Monday, April 27, 2015

वस्तु ( लघुकथा 39 )

" माँ देखो ! आज हम भिक्षा में क्या उत्तम दुर्लभ वस्तु लाये हैं ।" 
" ये क्या कह गए पति धर्मराज ! आपने तो समस्त नारी जाति को सदा के लिए वस्तु के बोझ तले दबा दिया ।"
( शशि )

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