" ये आपकी बहू शाहिना ! पैर छुओ बाबूजी के ।"
" परे हटो ! मेरा कोई बेटा - बहू नहीं ।"
" पिताजी ! इतने वर्ष बीत गए , अब तो क्षमा कर दीजिये ।"
" नहीं । असंभव । मेरे लिए तू उसी दिन मर गया था , जब परिवार और गैर - जाति प्रेम के बीच इस लड़की को चुना था ।"
" पर आपकी ही सीख थी , प्रेम से बड़ा कोई मज़हब नहीं ।"
" तो यही प्रेम बचा था करने के लिए ।जाओ , मुझे सीख मत दो ।"
" जी । वो तो बस आपका पोता अपने दादा से मिलने की जिद कर रहा था , इसलिए ...।" पीछे खड़े बेटे को आगे करते हुए शाहिना ने कहा ।
" अरे! ये तो बिलकुल मेरे बेटे पर ही गया है ।आ बेटा ! कलेज़ा ठंडा कर दे इस बूढ़े का । "
बेटा-बहू आत्म-संतोष से मुस्कुरा एक-दुसरे की आँखों में कह रहे थे -
" दीवार ही तो थी , ढह गई ।"
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मौलिक व अप्रकाशित ।
" परे हटो ! मेरा कोई बेटा - बहू नहीं ।"
" पिताजी ! इतने वर्ष बीत गए , अब तो क्षमा कर दीजिये ।"
" नहीं । असंभव । मेरे लिए तू उसी दिन मर गया था , जब परिवार और गैर - जाति प्रेम के बीच इस लड़की को चुना था ।"
" पर आपकी ही सीख थी , प्रेम से बड़ा कोई मज़हब नहीं ।"
" तो यही प्रेम बचा था करने के लिए ।जाओ , मुझे सीख मत दो ।"
" जी । वो तो बस आपका पोता अपने दादा से मिलने की जिद कर रहा था , इसलिए ...।" पीछे खड़े बेटे को आगे करते हुए शाहिना ने कहा ।
" अरे! ये तो बिलकुल मेरे बेटे पर ही गया है ।आ बेटा ! कलेज़ा ठंडा कर दे इस बूढ़े का । "
बेटा-बहू आत्म-संतोष से मुस्कुरा एक-दुसरे की आँखों में कह रहे थे -
" दीवार ही तो थी , ढह गई ।"
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मौलिक व अप्रकाशित ।
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