" पापा ! मैं कह चुका हूँ मुझे गायक बनना है , फिर आप क्यों मुझे इंजीनियर बनाने की जिद पकड़े बैठे हैं ? "
" हमारे खानदान में आजतक कोई गवैया नहीं बना ।मुझे भी सफल पिता बन समाज में प्रतिष्ठा कमाना है , इसलिए जो फैसला मैंने कर लिया , वही अंतिम है , बस ।"
विषय के प्रति रूचि के अभाव में वह हर परीक्षा में अनुत्तीर्ण होता गया ।अंततः निराशा , असफलता और पिता की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने की कुंठा व डर में अप्रत्याशित कदम उठा उसने भी अपना अंतिम फैसला जता दिया ।
शशि
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