Sunday, June 7, 2015

पुनरावृत्ति नहीं होगी ......( लघुकथा 51 )


" हाँ हाँ ... अब तो तुम्हे मेरी हर बात बुरी लगती है ।"
" ओफ़्फ़ो..... । तंग आ गया हूँ मैं तुम्हारी रोज़-रोज़ की खिट्-खिट् से ।"
" ओ के बाबा , पर ये बताओ आप अपनी बिट्टो को आज कहाँ घुमाने ले जा रहे हैं ?" अचानक लहज़ा बदल दीपा ने श्याम के गले में बाँहे डाल दी ।
बदले वातावरण को भाँप श्याम ने कनखियों से दरवाज़े की ओर देखा और तुरंत बोला -" यूँ कहो न । भई.... आज तो हम अपनी बिट्टो रानी और उसकी मम्मी को 'ज़ू' ले जाएँगे, बड़े-बड़े शेर,चीते,भालू दिखाएँगे ।आइस क्रीम खिलाएँगे ।"
सुनते ही बिट्टो खिलौना फेंक पापा की गोद में चढ़ चहककर ताली बजाने लगी । उसे इतना खुश पा आत्मग्लानि से दीपा ने श्याम की ओर देखा । दोनों को एक-दुसरे की आँखों में अगुच्छित, कुंठित, सहमा-काँपता बचपन तैरता दिखाई दिया । पर चेहरों पर संतुष्टि व तटस्थता के भाव थे जो मुखरित हो कह रहे थे -
" पुनरावृत्ति कभी नहीं होगी ।"
( शशि )

No comments:

Post a Comment