" शीतु ! क्या तुम मुझसे विवाह कर खुश नहीं ? "
" ऐसा क्यों कहा आपने ? "
" क्योंकि नवविवाहिता की सी आतुरता , प्रतीक्षा , चमक , खिलखिलाहट कुछ भी तो नहीं टपकता तुमसे । "
" ये आपका भ्रम भी तो हो सकता है ।"
" हाँ , क्यों नहीं । वैसे आज दोपहर में कहाँ थीं तुम ? "
" जी ... सहेली के हठ पर रेस्तरां जाना पड़ा ।"
" हम्म् ! देखा था , तुम्हे भी और उसे भी । "
" क्या ...? "
" शीतु ! अतीत एक मीठी याद बन कर रह जाये , यही उचित है ।अब , पुरानी गांठे खोलनी है , या नई जोड़नी , ये तुम्हे तय करना है । "
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