"क्या हुआ सूरज मियाँ।इतने लाल-पीले क्यों हो रहे हो ? "
" धरती बहन ! तुम तो ऐसे पूछ रही हो , जैसे कुछ जानती नहीं ।"
"अब यूँ पहेलियाँ न बुझाओ , जो कहना है साफ-साफ कहो ।"
" अरे ! इन नामुरादों की अपनी राजनीति क्या कम थी जो अब मुझे भी ला घसीटा ।बताओ भला ।"
" पहले काँटे की चुभन से ही घबरा गए मियाँ ! मैं तो कहती हूँ , ध्यान न धरो , बस मजे लो ।इन ऊँटों को करवट बदलते देर नहीं लगती ।"
शशि
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