Thursday, January 29, 2015

ब्राह्मणी (लघु कथा - 8 )


      बीमार पति की मृत्यु से दुखी ब्राह्मणी उदास बैठी सोच रही थी कि अब मुझ विधवा को कौन जिमने बुलाएगा ।भले ही पति वर्षों से लकवा ग्रस्त हो बिस्तर पर पड़ा था पर माँग का सिन्दूर जीवित है करके आये दिन के निमंत्रण से गुजर बसर हो जाती थी पर आज उससे वो आसरा भी छीन गया था ।वह बैठी अपने सबसे पूज्य ब्राह्मणी पद को
कोस रही थी जिसने उसे इस लायक भी नहीं छोड़ा था कि कहीं झाड़ू पौछा बर्तन आदि करके पेट भर लेती ।
(शशि)

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