इतना खराब परीक्षा परिणाम ।देखो बच्चों ! तुम अभी शिक्षा का महत्तव समझ नहीं रहे हो।कमरों की बंद दीवारों ने तुम्हारे मस्तिष्क को भी बंद कर दिया है। लगता है शिक्षा के महत्तव को किताबी ज्ञान से समझाना मेरी ही भूल थी ।
देखो बच्चों ये अधूरा, उबड़- खाबड़ ,असुंदर घर।इसे बनाने वाले हाथों ने शायद मिट्टी के कंकड़ - पत्थरों को ठीक से छाना नहीं, न ही इस मिट्टी ने संघर्ष रुपी पैरों की रौंदन सही है। विद्यार्थी भी गुरु के लिए कच्ची मिट्टी के समान होता है।मैं भाग्यवान हूँ जो मुझे कुम्हार की तरह तुम्हे तराशने -संवारने और आकार देने का सौभाग्य मिला है । मैं नहीं चाहता कल को तुम सब भी इस घर की तरह आधे - अधूरे और असुंदर बनो । बच्चों यदि तुमने पढ़ने की इस उम्र को सिर्फ खेल कूद में बीता दिया तो तुम्हारा भविष्य संवर नहीं पायेगा और उचित समय बीत जाने पर भविष्य के सभी मार्ग उस दरवाजे की तरह बंद हो जाएँगे ।गुरु होने के नाते मैं भी एक प्रण लेता हूँ कि आज से तुम सब बच्चे इसी जगह अध्ध्यन करोगे ताकि मैं भी प्रेरित होता रहूँ मुझ से गलती न हो इस घर की तरह तुम्हे बनाने में ।मैं चाहता हूँ, मेरी और तुम्हारी दोनों की साधना एकाकार हो जाये ।धीरे -धीरे आकाश की धुन्ध छँटने लगी ,अब आकाश पूरे तेज़ से चमक रहा था ।
( शशि )
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