Saturday, February 21, 2015

नजरिया ( लघु कथा - 12 )


"नो बज गए हैं अब तो उठ जाओ ।"
"ओफ्फो!!!! क्यों जगा रहे हो इतनी जल्दी ।आज दफ्तर की छुट्टी है ।" 
" मेरी तो नहीं है अगर नाश्ता बना देती तो ....."
" माताजी से कह दो , वो बना देंगी ।" 
"क्या है ये... , छुट्टी है तो सोते रहोगे क्या ? मुझे ड्यूटी पर जाने में देर हो रही है , उठिए, मुन्नू को स्कुल के लिए तैयार कर दीजिये और हाँ बहुत दिनों से कमरे की सफाई नहीं हुई, आज याद से कर देना ।"
( शशि )

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