सुरेश अपने मित्र सोम के घर पहुँचा तो वहाँ पूरे परिवार को टीवी के बजट के शोर के साथ खिल-खिलाते देख अवाक़ हो गया ।सोम के अनुभवी पिता को सुरेश की आँखों में तैरते प्रश्नों को पढ़ने में देर न लगी ।उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए बोले -" बेटा ! मेरे घर का बजट कागज के नोटों से नहीं बल्कि छोटी-छोटी खुशियों की रंगीन स्याही भरकर संतुष्टि की मज़बूत कलम से लिखा जाता है।"
( शशि )
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