Tuesday, March 17, 2015

स्टिंग ऑपरेशन - ( विषयाधारित लघु कथा - 21)

"माँ आज मेरे चीफ और कुछ दुसरे मेहमान डिनर पर आ रहे हैं। तुम जरा ढंग के कपडे पहन लेना और अपने कमरे से बाहर मत निकलना और हाँ सोना तो बिलकुल मत तुम्हारे तेज़ खर्राटे की आवाज से पार्टी का मज़ा किरकिरा हो जायेगा ।और ये सुने हाथ कुछ जेवर क्यूँ नहीं डाले तुमने ?"
"बेटा जेवर तो सब तेरी पढाई में ..... ।"
"बस बस रहने दो अहसान का बोझ मत लादो मुझ पर ।"
रंगारंग पार्टी के बीच अचानक खर्राटे की आवाज गूँज उठी । सुबह से भूखी प्यासी माँ अपनी नींद पर काबू न कर पाई ।चीफ के कहने पर उसे अपनी माँ का परिचय कराना ही पड़ा ।विदेशी चीफ भारतीय संस्कृति के प्रति मोह को दर्शाते हुए कभी लोक गीत गाने की फरमाइश करता तो कभी लोक नृत्य की ।फरमाइश पूरी होते न देख बेटा मन ही मन कुढ़ते हुए माँ को आँख दिखाने लगा ।अचानक चीफ उनसे फुलकारी की साड़ी बनाने की माँग कर विदा हो गया ।बेटा दौड़ा दौड़ा माँ के पास आ कर पैर दबाते हुए उनसे अपने प्रमोशन और बड़ा अफसर बनने की दुहाई देने लगा ।बेटे के कलुषित मन, स्वार्थ ,महत्त्वाकांक्षाओं के स्टिंग को समझते हुए भी अंधी ममता से लाचार माँ स्वयं स्टिंग का शिकार होने को तैयार हो गई ।
(शशि )
(भीष्म साहनी की कथा "चीफ की दावत" से प्रेरित )

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