Monday, March 30, 2015

अनुभव ( लघु कथा -27)

" क्या देख रहे हो मुँह उठा - उठा कर ? ये सफेदी रास नहीं आ रही न तुम्हे ।सोचते हो बाल रंगकर , क्लीन शेव कर दुबारा पुराना चेहरा पा लोगे पर क्या झुर्रियों को भी....? मैं कल था और तुम आज ।अब तुम्हारी सुंदरता तुम्हारा संचित अनुभव है ।"
(शशि)

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