Tuesday, April 7, 2015

अग्नि-परीक्षा ( लघु कथा 32 )

 " बहु दफ़्तर से चार दिन देर से  आई , और पड़ौसियों की दो -चार बातें क्या सुन लीं ,तुने उसे तलाक देने का सोच लिया ?
पागल तो नहीं हो गया न तू ...।"
" माँ ! लगता है बचपन में सिखाया राम का पाठ आज खुद भूल गई हो ।"
( शशि )


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