Friday, May 15, 2015

ममता नहीं मरती ....( लघुकथा 44 )

एक जोड़ा दो पहिया वाहन पर तेज़ गति से हाइवे पर गुजर रहा था ।स्त्री की गोद में एक नन्हा बालक था जो हवा के झोंकों से उनींदा हो रहा था ।पुरुष बार बार पीछे मुड़कर पत्नी से बात कर रहा था ।पत्नी ने टोका भी पर उसने अनसुना कर दिया ।अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया , क्योंकि पीछे से आता हुआ एक ट्रक लगातार तेज हॉर्न देते हुए ' ओवर-टेक ' करने का प्रयास कर रहा था ।अनहोनी हो चुकी थी ।दंपत्ति सामने से आती बस से टकरा चुके थे ।स्थिति भाँप माँ ने दोनों हाथों से बच्चे को भींच लिया था ।गिरते हुए भी मस्तिष्क बच्चे को कोई आँच न आये इस दिशा में काम कर रहा था ।वह अपने प्रयास में सफल रही पर स्वयं लहूलुहान हो गई ।पास गिरा बालक दहशत से दहाड़े मार रोने लगा ।पर महिला को न अपनी अवस्था का होश था और न आस-पास जमा मूक दर्शकों का । माँ को उठता न देख  बच्चे ने जोर-जोर से आँचल खींचना शुरू कर दिया ।बच्चे के नन्हे कोमल हाथों का स्पर्श पाते ही उसके शरीर में अचानक हलचल हुई । उसने अपना आँचल बच्चे के लिए खोल दिया और चेतना शून्य हो गई ।बच्चा अपना आहार पा चुप हो गया । स्त्री का शरीर मर चुका था पर माँ का मातृत्व अभी भी जीवित था ।
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मौलिक एवं अप्रकाशित ।
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शशि बंसल

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