Friday, May 15, 2015

शतरंज ( लघु कथा 45 )

 " बहुत आभारी हूँ विधायक जी ! आपने मुझे प्रोन्नत कर  ऊँचे ओहदे के लायक समझा । मैं आपको कतई निराश नहीं करूँगा ।"
" हम्म । यही उम्मीद थी । जाओ  और सबसे पहले पुल निर्माण वाले प्रोजेक्ट को मंजूरी दो ।"
" ये नहीं हो सकता सर ! लाखों जिंदगियों का सवाल है ।"
" ठीक है । फिर अपनी वापसी भी तय समझिये  ।"
( शशि )

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