Thursday, September 24, 2015

सम्मान ( लघुकथा 78)


सम्मान ( लघुकथा 78)

" ए लड़की ठीक से बैठ । "
" अरी ओ , तू आज फिर कल वाली फ़्रॉक पहन आई ।"
" सुन तो , जाके नीचे से चपरासी को तो बुला के ले आ । "
बगल की कक्षा से तिरस्कार सूचक आवाजें सुन तिलमिला जाती वसुधा । एक दिन निश्चय कर वह अपनी कक्षा छोड़ उसकी कक्षा में जा पहुँची और कहा " आप शिक्षिका होकर भी बच्चों से इस तरह बात क्यों करती हैं ? ऐसे तो ये कभी किसी शिक्षक का सम्मान नहीं करेंगे । "
" आपसे किसने कहा , हम गरीब मजदूरों के बच्चों से सम्मान पाने यहाँ आते हैं ? "

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